हंसा तो मोती चूने–(ओशो)
हंसा तो मोती चूने–(ओशो) प्रवचन–10 यह महलों , यह तख्तों , यह ताजों की दुनिया यह इन्सां के दुश्मन समाजों की दुनिया यह दौलत के भूखे रिवाजों की दुनिया यह दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है! हर एक जिस्म घायल , हर इक रूह प्यासी निगाहों में उलझन , दिलों में उदासी यह दुनिया है या आलमे-बदहवासी यह दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है! यहां इक खिलौना है इन्सां की हस्ती यह बस्ती है मुर्दा -परस्तों की बस्ती यहां पर तो जीवन से है मौत सस्ती यह दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है! जवानी भटकती है बदकार बनकर जवा जिस्म सजते हैं बाजार बनकर यहां प्यार होता है व्योपार बनकर यह दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है! यह दुनिया जहां आदमी कुछ नहीं है वफा कुछ नहीं , दोस्ती कुछ नहीं है जहां प्यार की कद्र ही कुछ नहीं है यह दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है! जला दो उसे फूंक डालो यह दुनिया मेरे सामने से हटा लो यह दुनिया तुम्हारी है तुम ही सम्हालो यह दुनिया यह दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है! -------------------------------------------------- चहल -पहल की इस नगरी में हम तो निपट बिराने हैं हम इतने ...